Returned From Abroad आजकल बहुत से भारतीय नौकरी, पढ़ाई या बिज़नेस के लिए विदेश जाते हैं। कई लोग सालों तक वहीं रहकर काम करते हैं और फिर वापस भारत लौट आते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सामने आता है – क्या विदेश से होने वाली आय (Global Income) पर भारत में टैक्स देना पड़ेगा? इसका जवाब हर व्यक्ति के टैक्स स्टेटस और इनकम के सोर्स पर निर्भर करता है।
इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि भारत लौटने के बाद आपकी ग्लोबल इनकम पर टैक्स कैसे लगता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस (Tax Residency Status)
Returned From Abroad भारत में टैक्स देना या न देना आपके रेजिडेंसी स्टेटस पर निर्भर करता है। आयकर विभाग (Income Tax Department) इसके लिए कुछ नियम बनाता है।
- रेजिडेंट (Resident): अगर आप एक वित्त वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में भारत में 182 दिन या उससे ज्यादा रहते हैं, तो आपको रेजिडेंट माना जाएगा।
- नॉन-रेजिडेंट (NRI): अगर आप भारत में 182 दिन से कम रहते हैं, तो आप NRI कहलाते हैं।
- RNOR (Resident but Not Ordinarily Resident): यह बीच की स्थिति होती है। इसमें व्यक्ति भारत में रेजिडेंट तो होता है, लेकिन बीते 10 सालों में से 9 साल भारत के बाहर रहा हो।
2. रेजिडेंसी स्टेटस के हिसाब से टैक्स
- Resident – अगर आप रेजिडेंट हैं, तो आपकी पूरी दुनिया की आय (Global Income) भारत में टैक्सेबल होगी।
- उदाहरण: आपने अमेरिका में प्रॉपर्टी किराये पर दी है और वहीं से इनकम हो रही है, तो वह भी भारत में टैक्सेबल होगी।
- Non-Resident (NRI) – अगर आप NRI हैं, तो भारत में सिर्फ वही इनकम टैक्सेबल होगी जो भारत से आती है।
- उदाहरण: अगर आपके पास भारत में मकान है और उसका किराया मिलता है, तो वह टैक्सेबल है। लेकिन अमेरिका की सैलरी पर भारत में टैक्स नहीं लगेगा।
- RNOR – इसमें सिर्फ भारत से जुड़ी हुई या भारत में मिलने वाली इनकम पर टैक्स देना होगा। विदेशी इनकम पर टैक्स नहीं लगेगा।
3. डबल टैक्सेशन से बचाव (Double Taxation Avoidance Agreement – DTAA)
Returned From Abroad कई बार ऐसा होता है कि आपने एक ही इनकम पर दो देशों में टैक्स दे दिया – पहले उस देश में जहां कमाई हुई और फिर भारत में। इस परेशानी से बचाने के लिए भारत ने कई देशों के साथ DTAA (Double Taxation Avoidance Agreement) किया है।
- अगर आपने विदेश में टैक्स दिया है, तो भारत में उसी इनकम पर छूट या रिबेट मिल जाएगी।
- इसका फायदा यह है कि एक ही इनकम पर बार-बार टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
4. कौन-कौन सी इनकम टैक्सेबल होती है?
भारत लौटने के बाद आपको यह समझना होगा कि आपकी कौन-सी इनकम पर टैक्स लगेगा:
- भारत में कमाई गई इनकम – जैसे सैलरी, बिज़नेस प्रॉफिट, मकान किराया, सेविंग अकाउंट या FD पर ब्याज।
- विदेश से कमाई गई इनकम – यह आपके रेजिडेंसी स्टेटस पर निर्भर करता है।
- विदेशी बैंक अकाउंट का ब्याज – अगर आप रेजिडेंट बन गए हैं, तो इसे भी बताना होगा।
5. ITR में जानकारी देना जरूरी
अगर आप विदेश से लौटकर भारत में रह रहे हैं और रेजिडेंट कैटेगरी में आते हैं, तो आपको अपनी विदेशी संपत्ति और बैंक अकाउंट की डिटेल ITR (Income Tax Return) में देनी होगी।
- अगर यह जानकारी छुपाई गई, तो आयकर विभाग भारी जुर्माना और पेनल्टी लगा सकता है।
- इसलिए ट्रांसपेरेंसी रखना बहुत जरूरी है।
6. उदाहरण से समझें
मान लीजिए रमेशजी 10 साल दुबई में नौकरी करके भारत लौटे हैं। अब वे भारत में रह रहे हैं और उनकी दुबई की बैंक अकाउंट में अभी भी पैसा है।
- अगर रमेशजी भारत में साल के 182 दिन से ज्यादा रहते हैं, तो वे Resident माने जाएंगे।
- ऐसे में उन्हें दुबई के अकाउंट का ब्याज भी भारत में टैक्स के तहत दिखाना होगा।
7. कैसे बचा सकते हैं टैक्स?
- DTAA का फायदा लें – जिस देश में आपने टैक्स दिया है, उसका प्रमाण रखिए और भारत में टैक्स रिबेट का दावा कीजिए।
- सेविंग और निवेश की सही प्लानिंग करें – जैसे 80C, 80D जैसी छूट का लाभ उठाएं।
- चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सलाह लें – अगर आपकी इनकम कई देशों से जुड़ी है, तो एक्सपर्ट गाइडेंस लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
Returned From Abroad विदेश से लौटने के बाद आपकी ग्लोबल इनकम पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह आपके रेजिडेंसी स्टेटस पर पूरी तरह निर्भर करता है। अगर आप रेजिडेंट बन जाते हैं, तो आपको अपनी पूरी दुनिया की इनकम भारत में दिखानी होगी। वहीं, अगर आप NRI या RNOR हैं, तो सिर्फ भारत से जुड़ी इनकम पर टैक्स देना होगा।
इसलिए भारत लौटने के बाद अपनी टैक्स प्लानिंग समय पर करें और ITR सही तरीके से भरें। इससे न केवल आप टैक्स कानून का पालन करेंगे बल्कि अनावश्यक पेनल्टी से भी बचेंगे।






