One Nation One Ration Card भारत एक विशाल देश है जहाँ हर राज्य की अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा है। इसी विविधता के बीच सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) शुरू किया था, जिसके जरिए राशन दुकानों से सस्ता अनाज मिलता है। लेकिन पहले यह सुविधा सिर्फ उसी राज्य या जिले तक सीमित थी, जहाँ राशन कार्ड बना हुआ था। अगर कोई मजदूरी या नौकरी के लिए दूसरे राज्य चला जाए, तो राशन पाना मुश्किल हो जाता था।
इसी समस्या का समाधान है – वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) योजना। यह योजना देशभर में लागू की गई है ताकि कोई भी नागरिक कहीं से भी सस्ता राशन ले सके। आइए जानते हैं यह योजना कैसे बनी और इसके क्या फायदे आम लोगों को मिलते हैं।
योजना कैसे बनी?
One Nation One Ration Card की शुरुआत 2019 में की गई थी। सरकार का मकसद था कि कोई भी गरीब व्यक्ति चाहे किसी भी राज्य में क्यों न हो, अपने राशन कार्ड से अनाज ले सके।
- पहले राशन कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ उसी राज्य में किया जा सकता था जहाँ वह बना हो।
- लेकिन प्रवासी मजदूर, नौकरीपेशा लोग और गरीब परिवार जो रोज़गार की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य जाते थे, उन्हें परेशानी होती थी।
- इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक इंटीग्रेटेड सिस्टम बनाया जिसमें सभी राज्यों के राशन कार्ड एक साथ जुड़े।
आज यह योजना पूरे देश में लागू है और हर कोई एक ही राशन कार्ड से पूरे भारत में राशन ले सकता है।
One Nation One Ration Card योजना का मुख्य उद्देश्य
- गरीबों को सुविधा देना – ताकि उन्हें राज्य बदलने पर परेशानी न हो।
- भ्रष्टाचार कम करना – राशन की चोरी और फर्जी कार्ड को रोकना।
- पारदर्शिता बढ़ाना – राशन वितरण की निगरानी आसान बनाना।
- समान अधिकार देना – देश के हर नागरिक को कहीं भी सस्ता राशन मिले।
One Nation One Ration Card: कैसे बना और आम लोगों को क्या फायदे मिलते हैं यह योजना कैसे काम करती है?
- सरकार ने सभी राशन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक किया है।
- ऑनलाइन सिस्टम (POS मशीन) के जरिए राशन दुकान पर फिंगरप्रिंट से पहचान की जाती है।
- अगर कोई व्यक्ति अपने गांव से निकलकर दिल्ली, मुंबई या किसी और राज्य में काम करता है, तो वह वहाँ की नज़दीकी राशन दुकान से अपना राशन ले सकता है।
- राशन कार्ड के सदस्य चाहे अलग-अलग जगह हों, हर कोई अपने हिस्से का अनाज ले सकता है।
आम लोगों को क्या फायदे मिलते हैं?
1. प्रवासी मजदूरों के लिए बड़ी राहत
भारत में करोड़ों लोग रोज़गार के लिए अपने राज्य से बाहर जाते हैं। पहले उन्हें राशन पाने में कठिनाई होती थी। लेकिन अब जहाँ काम करते हैं, वहीं राशन ले सकते हैं।
2. परिवार के सभी सदस्य लाभ उठा सकते हैं
अगर परिवार के सदस्य अलग-अलग शहरों में रहते हैं, तो भी हर कोई अपने हिस्से का राशन ले सकता है।
3. अनाज की चोरी और फर्जीवाड़ा कम हुआ
क्योंकि हर जगह फिंगरप्रिंट और आधार से पहचान होती है, इसलिए राशन चोरी की संभावना घट गई है।
4. महिलाओं और बच्चों को सीधा लाभ
इस योजना से महिलाओं और बच्चों तक सस्ता राशन आसानी से पहुँच रहा है, जिससे पोषण स्तर बेहतर हो रहा है।
5. पूरे देश में एक समान सुविधा
चाहे कोई बिहार से हो या तमिलनाडु से, अब हर राज्य में एक जैसा राशन मिलेग
अब तक के आंकड़े
- योजना पूरे 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है।
- करोड़ों परिवार इस योजना से लाभ ले रहे हैं।
- हर महीने लाखों टन अनाज लोगों तक पहुँच रहा है।
चुनौतियाँ भी हैं
हालाँकि यह योजना बहुत लाभदायक है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं:
- कई जगह इंटरनेट और मशीन की कमी।
- कुछ बुजुर्गों को फिंगरप्रिंट मिलान में दिक्कत होती है।
- लोगों को नई प्रणाली समझने में समय लग रहा है।
फिर भी सरकार लगातार सुधार कर रही है ताकि सभी तक सुविधा आसानी से पहुँच सके।
निष्कर्ष
वन नेशन वन राशन कार्ड योजना गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब किसी को भूखे रहने की मजबूरी नहीं होगी, क्योंकि एक ही कार्ड से पूरे देश में कहीं भी राशन मिल सकता है। इससे न केवल लोगों को राहत मिली है, बल्कि पारदर्शिता और समानता भी बढ़ी है।
यह योजना साबित करती है कि अगर तकनीक का सही उपयोग हो तो देश के गरीब और आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।






